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The Pioneer in Raipur(Chhattisgarh)

श्री सेवाराम टिकरिहा का जन्म दुर्ग जिले के सिलघट ग्राम में हुआ था। पिता श्री उजियार सिंह शिक्षक थे। सेवारामजी कृषि विद्यालय से शिक्षा पाने के बाद कृषि प्रसाद अधिकारी बन गये। वे समाजसेवी व्यक्ति थे। नौकरी में रहते हुए भी समाज के संगठन के लिए यथाशक्ति कार्य किया करते थे।

सन् 1930 में अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महाधिवेशन, रायपुर में डॉ. खूबचन्द बघेल के सहयोगी बनकर समाज का कार्य करने लग गये। 25 फरवरी, 1950 को मनवा कुर्मि समाज के भिलाई अधिवेशन में आगामी वर्ष के लिए सेवारामजी अध्यक्ष व धनीरामजी मंत्री निर्वाचित हुए। उस समय भूतपूर्व अध्यक्ष और मंत्री से चार्ज में नये अध्यक्ष और मंत्री को कोई रिकार्ड, रजिस्टर और सामान तथा रकम आदि नहीं मिलने पर भी समाज का कार्य सुचारू रूप से चलाने का निश्चय किया था। उससे समाज के सम्यक संचालन में कुछ असुविधा का अनुभव हुआ। दोनों निःस्वार्थ सेवाभावी थे। साथ ही समाज को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने की तीव्र भावना थी। इसलिए नई कार्यकारिणी का गठन करने के लिए उसकी बैठक बुलाई गई। उसमें मनवा समाज के संगठन को सुचारू रूप से बढ़ाने के लिए गहन विचार विमर्श किया गया। उस बैठक में निश्चित किया गया कि अर्थ-व्यवस्था के लिए मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रत्येक परिवार की आमदनी से कम से कम शुल्क निर्धारित करके अर्थ संचय किया जावे। उसके लिए प्रत्येक परिवार की धान की उपज से प्रति गाड़ा पर एक आना शुल्क लगेगा। नौकरी वाले और व्यवसायी व्यक्तियों से उनकी आमदनी के प्रति सैकड़ा पर भी सिर्फ एक आना वार्षिक शुल्क देय होगा। इस तरह आठों राज के आठों राजप्रधानों के द्वारा उपरोक्त शुल्क वसूल करके केन्द्र में कोषाध्यक्ष के पास जमा करने का नियम लागू कर दिया गया। उससे प्रतिवर्ष समाज से यथेष्ट रकम जमा होने लगी और उससे समाज का खर्च सुचारू रूप से चलने लगा तथा कुछ बचत भी होने लग गयी।

सेवाराम जी ने समयानुसार 5 वर्ष तक अध्यक्ष पद पर रहे। उसके बाद वे भोला कुर्मी छात्रालय की ट्रस्ट कमेटी के मंत्री रहे।

सन् 1989 में मृत्यु हो गयी।

-- इति समाप्तम् --

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