आपसे आग्रह

हमें अपने लेख आलेख, कविता, कहानी, सामाजिक गतिविधियां, सामाजिक युवा पीढ़ी की उपलब्धियां, कृषि के क्षेत्र में किए गए हमारे मूलभूत उपलब्धियां, ऐसी हर वो जानकारी जो आप अपने साथ-साथ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते है, सहर्ष आमंत्रित है

हमारा उद्​देश्य

सारे कुर्मी समाज को इंटरनेट के माध्यम से एक मंच पर लाना और समाज की जानकारी कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचाना।

हमारा सम्पर्क सूत्र

हमारा ई-मेल - info+kurmisamaj.com
[+ के स्थान पर @ चिन्ह लगायें]

दानवीर श्री भोला प्रसादजी वर्मा रायपुर जिले के गिरौद ग्राम के पुराने मालगुजार थे। वे यद्यपि मांढर स्कूल से प्रायमरी तक की शिक्षा प्राप्त थे। तथापि उनकी विलक्षण, बुद्धि और कलाप्रियता तथा राष्ट्रीय भावना के कारण गिरौद गांव आदर्श ग्राम माना जाता था। गांव के लोगों को अनेक प्रकार से प्रेरणा देकर समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहते थे। श्री भोला प्रसाद जी भोलाशंकर के समान बड़े दानी थे। इन्होंने कुर्मी क्षत्रिय समाज के छात्रों के लिए तथा अतिथियों के लिए अपना बड़ा बाड़ा छात्रालय और धर्मशाला के लिए सहर्ष दान में दिया है। जहां के छात्रों को सबसे कम खर्च में भोजन और निवास पाकर पढ़ाई करने का सुअवसर मिलता है। ये औघडदानी भी थे। राजिम मेले में एक गरीब ब्राम्हण को उसकी कन्या के विवाह के लिए याचना करने पर बड़े बैलो की जोड़ी समेत बैलगाड़ी उसे दान में दे दी थी। ब्रम्हाचर्य आश्रम राजिम को दान द्वारा हमेशा सहायता पहुंचाते थे। आश्रम के संचालक पं. सुंदरलाल जी शर्मा ने इनके दान की और समाज सेवा तथा राष्ट्रीय भावना की बहुत प्रंशसा की थी।

tularamदानवीर श्री तुलारामजी परगनिहा दुर्ग जिले के भिंभौरी ग्राम के पुराने मालगुजार थे। इनके पिता श्री पीताम्बर सिंह परगनिहा बड़े सहृदय व्यक्ति थे। अकाल के समय में तालाब और कुएं खुदवाकर हजारों लोगों को काम दिया और अपाहिजों के लिए भोजन की व्यवस्था कर देते थे। उनकी जन-सेवा के कारण वे अंग्रेज सरकार के द्वारा राय साहब की पदवी से सम्मानित किये गये।

बाबू परसराम जी बर्छिहा दुर्ग जिले के डिड़गा गांव के एक साधारण किसान के पुत्र थे। उनके गांव के पुराने मालगुजार (महाराष्ट्र) के संपर्क में आने पर इनको शिक्षा के प्रति बड़ी प्रेरणा मिली। वे रायपुर आकर मेट्रिक पास हो गये। इनके जीवन में महाराष्ट्र समाज की शिक्षा, सभ्यता और धर्मिक संस्कार का बड़ा प्रभाव पड़ा। उसी के अनुसार इनके दिल में भी अपनी कुर्मी जाति की उन्नति की भावना प्रस्फुटित हुई। इनको राजकुमार कालेज रायपुर में क्लर्क की नौकरी मिल गई। इनकी सच्ची कार्यशैली, नम्रता और सद्व्यवहार का प्रभाव छत्तीसगढ़ के राजाओं पर अच्छा पडा, क्योकि उनके राजकुमार वहां पढ़ते थे। और वे समय समय पर उनसे मिलने राजकुमार कालेज आते थे।

श्री सेवाराम टिकरिहा का जन्म दुर्ग जिले के सिलघट ग्राम में हुआ था। पिता श्री उजियार सिंह शिक्षक थे। सेवारामजी कृषि विद्यालय से शिक्षा पाने के बाद कृषि प्रसाद अधिकारी बन गये। वे समाजसेवी व्यक्ति थे। नौकरी में रहते हुए भी समाज के संगठन के लिए यथाशक्ति कार्य किया करते थे।

Raipur City

हमारे अतिथि

KurmiKurmiKurmiKurmiKurmiKurmi
Kurmiआज15
Kurmiकल249
Kurmiइस सप्ताह264
Kurmiपिछले सप्ताह1627
Kurmiइस माह1543
Kurmiपिछले माह7799
Kurmiकुल109540

हमारा रैंक