| 30 अप्रैल 2009
दानवीर श्री भोला प्रसादजी वर्मा रायपुर जिले के गिरौद ग्राम के पुराने मालगुजार थे। वे यद्यपि मांढर स्कूल से प्रायमरी तक की शिक्षा प्राप्त थे। तथापि उनकी विलक्षण, बुद्धि और कलाप्रियता तथा राष्ट्रीय भावना के कारण गिरौद गांव आदर्श ग्राम माना जाता था। गांव के लोगों को अनेक प्रकार से प्रेरणा देकर समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहते थे। श्री भोला प्रसाद जी भोलाशंकर के समान बड़े दानी थे। इन्होंने कुर्मी क्षत्रिय समाज के छात्रों के लिए तथा अतिथियों के लिए अपना बड़ा बाड़ा छात्रालय और धर्मशाला के लिए सहर्ष दान में दिया है। जहां के छात्रों को सबसे कम खर्च में भोजन और निवास पाकर पढ़ाई करने का सुअवसर मिलता है। ये औघडदानी भी थे। राजिम मेले में एक गरीब ब्राम्हण को उसकी कन्या के विवाह के लिए याचना करने पर बड़े बैलो की जोड़ी समेत बैलगाड़ी उसे दान में दे दी थी। ब्रम्हाचर्य आश्रम राजिम को दान द्वारा हमेशा सहायता पहुंचाते थे। आश्रम के संचालक पं. सुंदरलाल जी शर्मा ने इनके दान की और समाज सेवा तथा राष्ट्रीय भावना की बहुत प्रंशसा की थी।




















