| 28 सितम्बर 2009
छत्तीसगढ़ अंचल में अध्यात्म की चेतना फूंकने वाले छत्तीसगढ़ के महान तीर्थ-स्थल विवेकानंद आश्रम के संस्थापक और प्रवर्तक स्वामी आत्मानन्दजी के अनुज राजेन्द्र का जन्म सन् 1944 देवोत्थान एकादशी के दिन को रायपुर में हुआ था। पिता प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धनीराम वर्मा तथा माता भाग्यवती देवी थी। धनीराम जी के पांच पुत्रों व एक पुत्री में इनका स्थान चतुर्थ है।
स्वामी आत्मानंदजी के रायपुर आगमन के बाद स्वामीजी के साथ विवेकानन्द आश्रम में रहकर विद्याध्ययन करते थे। अध्यात्म का गहरा असर पड़ने के कारण पढ़ाई के साथ-साथ ये आश्रम के धार्मिक कार्यों में पूर्ण रूप से सहयोग दिया करते थे।
सन् 1970 में रायपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से केमिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। दोनों बड़े भाई स्वामी आत्मानन्दजी और स्वामी निखिलात्मानंद जी के पुनीत साहचर्य व सन्यासी जीवन से प्रभावित होकर सन् 1972 में विवेकानन्द आश्रम में सम्मलित हो गये और सन्यास दीक्षा ग्रहण कर ली। तब से मई 1994 तक रायपुर के विवेकानन्द आश्रम में विभिन्न प्रकार के सेवा-कार्यों में सहसचिव के पद पर कार्य करते हुए अपना पूरा योगदान देते रहे हैं। उसके बाद जून 1994 से कलकत्ता के रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान में सेवा दे रहे हैं।





















