आपसे आग्रह

हमें अपने लेख आलेख, कविता, कहानी, सामाजिक गतिविधियां, सामाजिक युवा पीढ़ी की उपलब्धियां, कृषि के क्षेत्र में किए गए हमारे मूलभूत उपलब्धियां, ऐसी हर वो जानकारी जो आप अपने साथ-साथ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते है, सहर्ष आमंत्रित है

हमारा उद्​देश्य

सारे कुर्मी समाज को इंटरनेट के माध्यम से एक मंच पर लाना और समाज की जानकारी कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचाना।

हमारा सम्पर्क सूत्र

हमारा ई-मेल - info+kurmisamaj.com
[+ के स्थान पर @ चिन्ह लगायें]

जरूरत है

The Pioneer in Raipur(Chhattisgarh)

त्तीसगढ़ अंचल में अध्यात्म की चेतना फूंकने वाले छत्तीसगढ़ के महान तीर्थ-स्थल विवेकानंद आश्रम के संस्थापक और प्रवर्तक स्वामी आत्मानन्दजी के अनुज राजेन्द्र का जन्म सन् 1944 देवोत्थान एकादशी के दिन को रायपुर में हुआ था। पिता प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धनीराम वर्मा तथा माता भाग्यवती देवी थी। धनीराम जी के पांच पुत्रों व एक पुत्री में इनका स्थान चतुर्थ है।

स्वामी आत्मानंदजी के रायपुर आगमन के बाद स्वामीजी के साथ विवेकानन्द आश्रम में रहकर विद्याध्ययन करते थे। अध्यात्म का गहरा असर पड़ने के कारण पढ़ाई के साथ-साथ ये आश्रम के धार्मिक कार्यों में पूर्ण रूप से सहयोग दिया करते थे।

सन् 1970 में रायपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से केमिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। दोनों बड़े भाई स्वामी आत्मानन्दजी और स्वामी निखिलात्मानंद जी के पुनीत साहचर्य व सन्यासी जीवन से प्रभावित होकर सन् 1972 में विवेकानन्द आश्रम में सम्मलित हो गये और सन्यास दीक्षा ग्रहण कर ली। तब से मई 1994 तक रायपुर के विवेकानन्द आश्रम में विभिन्न प्रकार के सेवा-कार्यों में सहसचिव के पद पर कार्य करते हुए अपना पूरा योगदान देते रहे हैं। उसके बाद जून 1994 से कलकत्ता के रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान में सेवा दे रहे हैं।

-- इति समाप्तम् --

टिप्पणी जोड़े

:

:

:

:


Security code
नया कोड प्राप्त करें

The Pioneer in Raipur(Chhattisgarh)

Raipur City

हमारे अतिथि

KurmiKurmiKurmiKurmiKurmiKurmi
Kurmiआज51
Kurmiकल202
Kurmiइस सप्ताह1359
Kurmiपिछले सप्ताह1385
Kurmiइस माह3850
Kurmiपिछले माह6393
Kurmiकुल136841

हमारा रैंक