कपिलनाथ कश्यप का जन्म 6 मार्च, 1906 को ग्राम पौना, जिला-बिलासपुर में हुआ। कश्यप जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. की परीक्षा पास की पं. रामचंद्र शुक्ल, डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, डॉ.रामकुमार वर्मा आदि उनके शिक्षक थे। पटवारी पद से नौकरी प्रारंभ कर सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख पद से सेवानिवृत हुए। नौकरी के दौरान वे लगातार साहित्य साधना में लगे रहे। वे हिन्दी तथा छत्तीसगढ़ी में समान अधिकार के साथ साहित्य रचना करते थे।
रचनाएं –
छत्तीसगढ़ी साहित्य
महाकाव्य – श्रीराम काव्य, श्री कृष्ण काव्य।
काव्य संग्रह – अब तो जागो गजरा।
कथा संग्रह – डहर के कांटा, हीरा कुमार, डहर के फूल
एकांकी – अंधियारी रात नवा बिहान।
निबंध संग्रह –निसेनी।
भाषानुवाद – श्रीमद् भागवत गीता।
हिन्दी साहित्य –
खण्ड काव्य –वैदेही बिछोह, बावरीराधा, युद्ध आमंत्रण, सुलोचना विलाप, सीता की अग्नि परीक्षा, स्वतंत्रता के अमर सेनानी, कंस कारागार, आव्हान।
काव्य संग्रह - पीयूष एवं बिखरे फूल, न्याय, भ्रांत, श्री रामचन्द्र एवं चित्रलेखा।
उपरोक्त कृतियों में से तीन छत्तीसगढ़ी एवं एक हिन्दी कृति ही प्रकाशित है। शेष अप्रकाशित ग्रंथों की पांडुलिपियां उनके पुत्र श्री गणेश प्रसाद कश्यप के पास सुरक्षित है। डॉ. श्रीमती रजनी पाठक ने अपने शोध लेख में कश्यपजी के ग्रंथों का उल्लेख करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ी का अद्वितीय साहित्यकार कहा है। डॉ. विनय पाठक ने कश्यपजी के संपूर्ण साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कपिलनाथ कश्यपः व्यक्तित्व नामक ग्रंथ लिखा।
विस्तृत जानकारी के लिए कश्यप के पुत्र से संपर्क करे।
गणेश प्रसाद कश्यप व्याख्याता। भि.इ.उ.माध्यमिक विद्यालय, हिर्री खदान बिलासपुर (छ.ग.)





















