भुजबल सिंह कश्यप का जन्म रायपुर जिले के तरेसर ग्राम में हुआ। इनके पिता श्री मुकुटराम कश्यप जी भक्त स्वाभाव के थे जो तरेसर के मालगुजार थे।
प्राथमिक शिक्षा सिलयारी ग्राम में हुई। युवावस्था में डॉ.खूबचंद बघेल के साथ सामाजिक कार्य में लग गये। सन् 1930 के स्वराज्य आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के कारण गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल से छूटने के बाद सामाजिक संगठन के कार्य में लग गये। वे सरल व सीधे स्वभाव के थे और उनके नम्र स्वभाव के कारण लोगों में लोकप्रिय बन गये।
सन् 1942 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में पत्नी बेला बाई के साथ भाग लिया। सन् 1943 में कारावास से मुक्त होने के बाद गांव में रहकर खेती का कार्य देखते हुए राष्ट्रीय और सामाजिक कार्य करते रहे।
भुजबल जी ने मुंगेर आश्रम के स्वामी सत्यानन्द जी की प्रेरणा से सन्यास ग्रहण कर स्वामी सदाशिवनन्द हो गये।




















