| 19 सितम्बर 2009
सिकलिंग
रक्त में पायी जाने वाली बिमारी है। रक्त में हीमोग्लोबीन नामक प्रोटीन पायी जाती है जो ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करती है। हर प्रोटीन में अमीनो एसिड का एक निश्चित क्रम होता है जो उसे संरचना एवं कार्य प्रदान करता है। रक्त में स्थित इस प्रोटीन में अमीनो एसिड के क्रम में सातवें स्थान पर विद्मान ग्लूटॉमिक एसिड के बदले में वैलाईन आ जाता है जिससे प्रोटीन की संरचना बदल जाती है। इस संरचना में बदलाव के कारण लाल रक्त कण का आकार हंसिये का आकार का हो जाता है। इस आकार के कारण रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन कम हो जाता है।

हर व्यक्ति में जीन का एक जोड़ा पाया जाता है। बच्चों में यह जीन का जोड़ा माता-पिता से आये एक-एक जीन से बनता है। इस जोड़े में एक जीन डोमीनेन्ट(प्रभावी) तथा दूसरा रिसेसिव(अप्रभावी) कहलाता है। सिकलिंग का जीन रिसेसिव होता है। बच्चों में अगर दोनों ही जीन रिसेसिव टाईप का हो तो बच्चा सिकलिंग से पीड़ित होगा। अगर दोनों में एक जीन रिसेसिव टाईप का हो तो बच्चा सिकलिंग का वाहक होगा पीड़ित नहीं।






















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