
हमारा गौरव
जो छत्तीसगढ़ के हित को अपना हित समझता है, वह छत्तीसगढ़ी है। छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान को अपना मान-सम्मान समझने वाला छत्तीसगढ़ी है। चाहे वह किसी भी धर्म का हो, कोई भी भाषा बोलता हो तथा कहीं से आकर छत्तीसगढ़ में बसा हो।
हमारा समाज एक यंत्र की तरह है जिसमें सभी सदस्य पुर्जे की तरह हैं। जिसतरह मशीन का एक पुर्जा खराब होने से पूरी मशीन की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है ठीक उसी तरह एक व्यक्ति के निष्क्रिय होने अथवा समाज विरोधी कार्य करने से प्रगतिशील समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अतः हमें चाहिए कि समाज के प्रत्येक सदस्य को समाज के हित में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि कोई सदस्य समाज के कार्यों में रूचि न ले, निष्क्रिय हो अथवा समाज विरोधी कार्य करता हो तो हमें चाहिए कि उसके समाज विरोधी तथा निष्क्रिय होने का कारण ढूंढे एवं निराकरण भी करें। इस प्रक्रिया से हमारे समाज में प्रगति करने की जो परम्परा प्रचलन में आयेगी उससे हमारे समाज का उत्थान तो होगा ही साथ ही हम अन्य समाज के लिए आदर्श भी बन सकते हैं।















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